कांग्रेस खोई जमीन पाने को, तो ‘आप’ अपनी राजनीतिक करियर बचाने को मैदान में

नई दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री को चुनने का समय आ गया है। लोकसभा चुनाव 2019 की रणभेरी बज चुकी है और सभी पार्टियां चुनाव प्रचार का बिगुल फूंक चुकी हैं।

आज इस लेख में हम बात करेंगे राजधानी दिल्ली के चुनावी माहौल की। देश की राजधानी दिल्ली में 7 लोकसभा सीट हैं। दिल्ली के वोटिंग पैटर्न की बात करें तो दिल्ली देश के ऐसे चुनींदा राज्यों में से है जहां जाती के आधार पर वोटिंग अमूमन नही होती। 

Sheila Dikshit

लोकसभा चुनाव दिल्ली की तीनों प्रमुख पार्टियों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), आम आदमी पार्टी (आप) व कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस चुनाव परिणाम का सीधा असर दस माह बाद होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। इस चुनाव में जो पार्टी जीतेगी उसके लिए दिल्ली की सत्ता हासिल करने का मार्ग सुगम होगा। वहीं, हारने वाली पार्टी की सियासी मुश्किल बढ़ेगी।

भाजपा पर जहां जहां एक बार फिर सभी 7 सीटें जितने का दबाव है, तो वहीं कांग्रेस के लिए अपनी खोई जमीन वापिस हासिल करने का मौका है। आम आदमी पार्टी तो कुछ ज्यादा ही डरी हुई लग रही है, ऐसी बातें दिल्ली में आम हैं। 

Arvind Kejriwal

बता दें कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में राजधानी दिल्ली में बीजेपी ने क्लीन स्वीप करते हुए सभी सात सीटों पर कब्जा कर लिया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव में जबर्दस्त प्रदर्शन करने वाली आम आदमी पार्टी तब दिल्ली में अपना खाता तक नहीं खोल पाई थी। राज्‍य की चांदनी चौक सीट पर डॉ.हर्षवर्धन (केंद्रीय मंत्री), वेस्ट दिल्ली से प्रवेश वर्मा, नई दिल्ली से मीनाक्षी लेखी और नॉर्थ ईस्ट दिल्ली से मनोज तिवारी (प्रदेश भाजपा अध्यक्ष) वर्तमान सांसद हैं।  वहीं ईस्ट दिल्ली से महेश गिरी, साउथ दिल्ली सीट से रमेश बिधूडी और नॉर्थ-वेस्ट (आरक्षित) सीट से उदित राज सांसद हैं।

2017 दिल्ली के निगम चुनावों में करारी शिकस्त खाने के बाद से दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को अहसास है कि उनकी पार्टी के लिए इस बार भी खाता खोलना आसान नही है। केजरीवाल का डर साफ है कि अगर इस बार भी वो सातों लोकसभा सीट बीजेपी के हाथों गंवा देंगे तो उनके राजनीतिक कैरियर पर खतरे के बादल छा जाएंगे। लोकसभा की सातों सीट पर हार होने पर दिल्ली में माहौल आम आदमी पार्टी के खिलाफ बनेगा। अगले ही साल 2020 में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी उन्हें सीएम पद गंवाने का साफ डर है। 


Manoj Tiwari

ज्यादातर राजनीतिक विश्लेषक और अब तक सामने आए सारे सर्वे भी यही इशारा कर रहे हैं। यही एक बड़ा कारण है कि अरविंद केजरीवाल बीजेपी को हराने के नाम पर कांग्रेस से गठबंधन करने के लिए एक तरह से गिड़गिड़ा रहे हैं। वही कांग्रेस जिसके खिलाफ आंदोलन से ही आम आदमी पार्टी खड़ी हुई। वही कांग्रेस जिसके दिल्ली में इस समय एक भी सांसद या विधायक नही है। 

भाजपा की राह रोकने के लिए आम आदमी पार्टी व कांग्रेस के बीच गठबंधन की कवायद लगभग 2 महीने से चल रही है। यदि दोनों ही पार्टियों के बीच चुनावी गठजोड़ होता है तो इसका भी असर अगले विधानसभा चुनाव में पड़ेगा। यदि भाजपा इस संभावित गठजोड़ को मात देते हुए लोकसभा चुनाव में बढ़त बनाती है तो विधानसभा चुनाव में उसके पक्ष में माहौल बन सकता है। दूसरी ओर आप व कांग्रेस के लोकसभा चुनाव एक साथ लड़ने के बाद विधानसभा में एक दूसरे के खिलाफ मैदान में उतरकर मतदाताओं का सामना करना आसान नहीं होगा और इसी को आधार बनाकर दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शीला दीक्षित ‘आप’ से गठबंधन से साफ इंकार कर रही हैं। राहुल गांधी को शीला ओर उनकी टीम ने यही समझाया है कि केजरीवाल की जमीन खिसक रही है, इसलिए वो गठबंधन पर जोर दे रहे हैं, बिना गठबंधन “आप” खत्म हो जाएगी और कांग्रेस में जान आजायेगी। 

दिल्ली में सत्ता से सीधे फर्श पे पहुची कांग्रेस की बात करें तो वो भी खोई जमीन पाने की जुगत में है। हालांकि पीएम मोदी की फेस वैल्यू के आगे कांग्रेस का उठाव इतना आसान नही। लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ने माकन की जगह पार्टी ने एक बार फिर से पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित पर भरोसा  जताया है। नेतृत्व परिवर्तन से कार्यकर्ताओं में उत्साह भी है। यदि उनके नेतृत्व में पार्टी लोकसभा की कुछ सीटें जीतने में सफल रहती है तो विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद बढ़ जाएगी।

बीजेपी की बात करें तो पीएम मोदी के नाम और काम के साथ दिल्ली में वो अपने नए वोट बैंक पे भी काफी भरोसा कर रही है। दरअसल बनिया, ब्राह्मण और पंजाबी समुदाय की बहुतायत वाली दिल्ली में पिछले 15 सालों में यूपी बिहार यानी पूर्वांचली वोटर बहुत बड़ी संख्या में हो गए है। पहले ये कांग्रेस और फिर आम आदमी पार्टी के समर्थक बने। लेकिन 2015 में विधानसभा चुनाव में हार के बाद बीजेपी ने इस बात को समझा और भोजपुरी सुपरस्टार मनोज तिवारी को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर दांव खेला, वो 2017 दिल्ली नगर निगम चुनाव में सही साबित हुआ, बीजेपी ने बड़ी जीत हासिल की। विधानसभा चुनाव में आप के हाथों मात खाने वाली भाजपा नगर निगम चुनावों में शानदार जीत हासिल करने के बाद अब लोकसभा की सातों सीटों पर अपना कब्जा बरकरार रखने की कोशिश में है। यदि इसमें वह सफल रहती है तो दिल्ली की सत्ता तक का उसका सफर कुछ आसान हो सकता है, क्योंकि इससे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा। इसे ध्यान में रखकर भाजपा नेता पसीना बहा रहे हैं। उन्हें मालूम है कि एक भी सीट का नुकसान उनके लिए भारी पड़ेगा।

रही बात टिकट वितरण की तो कांग्रेस और आम आदमी पार्टी गठबंधन जी हां या ना के बीच फसे हैं, हालांकि “आप” ने सातों कैंडिडेट घोषित कर दिए हैं। बीजेपी में टिकट पर फैसला कांग्रेस-आप के गठबंधन होने या न होने की सूरत साफ होने के बाद होगा। लेकिन विश्वस्त सूत्रों के अनुसार नई दिल्ली सीट से सिटिंग एमपी मीनाक्षी लेखी की जगह क्रिकेटर गौतम गंभीर की टिकट पक्की है। दिल्ली में लोकसभा के लिए वोटिनफ 12 मई को होनी है। 

वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव

पार्टी-  वोट फीसद- सीट
भाजपा 46.39 7
आप 33.1 0
कांग्रेस   15.2 0